जिवन एक कतार

ज़िंदा थे तो जिवनभर कतार में खड़े रहे! कभी रेल्वे स्टेशन पर तिकीट निकाल ने के लिए, तो कभी बिजली का बिल भरने के लिए, तो कभी पासपोर्ट ऑफिस में..उम्र कट गयी जिवनभर कतार में खड़ा रह कर‌.
कैसा मंज़र आया है, करोना काल में.. मरने के बाद भी खुद को जला ने के लिए भी कतार लगानी पड़ रही है!

तुषार सीताराम बागडे
मोबाइल: ९८२०७१८०७९
Email: ttush555@gmail.com

आस्था में विवेक

हर कोई जिवन और मृत्यू की लढाई लढ़ रहा है करोना जैसी महामारी में..तो कहीं और क्षध्दालू  आस्था कि डूबकी लगा रहे हैं कुंभ के मेले में.. महामारी के चलते चिंताएं जल रही है स्मशानो में.. लेकिन हर किसी को पता होना चाहिए धर्म पालन तभी हो सकता है जब व्यक्ति जीवित वा स्वस्थ रहेगा..
ऐसा दूस्साहस करना आत्मघाती है!
आस्था में विवेक होना चाहिए, अंधापन नहीं!

तुषार सीताराम बागडे
मोबाइल: ९८२०७१८०७९
Email: ttush555@gmail.com

वो एक। रात

                           वो एक रात

आॉफीस का अॅन्युअल फंक्शन  मरीन प्लाझा हाॅटल में रखा था!  जैसे जैसे रात हो रही थी पार्टी का मजा बड रहा था! हरकोई पार्टी में दंग था! कोई शराब पीने में दंग था! तो कोई नाच गाने में दंग था, मैं शराब नहीं पीता तो मैं खाना खाकर वहां से निकल गया! लगभग रात के१० बजे थे! डिसेंबर का महिना था बाहर ठंड थी,  सोचा थोड़ी देर समुदर के किनारे टहलता हु!  बाद में बस  पकड़कर घर चला जाऊंगा ये सोचकर वहां से निकल पड़ा, थंड का मौसम था! थोड़ी देर समुद्र को देखता रहा! समुद्र की लहरें साहिल से टकरा रही थी!  जैसे किसीके मिलने की आस हो!  लोग अपने परीवार के साथ घुम्ने आए थे मरीन ड्राइव पर क़्वीन आॉफ नेकलेस रात के समय चमक रहा था! 
तभी एक लड़की सामने से हंसती हुई आ रही थी! अचानक सामने आई और बोली पहचाना मुझे थोड़ी देर स्तब्द रहकर देखता रहा, और बोला तुम कांदम्बरी हो ना, उसने कहा  इतनी देर लगा दी पहचान ने मैं! फिर उसने मुझे पुछा.. तुम  इस वक्त  यहां अकेले मरीन ड्राइव पर घूम रहे हो .. कोई साथ था क्या तुम्हारे वो हंस कर बोली.. नहीं मैं यहां आॉफीस की पार्टी के लिए मारिन प्लाझा आया था हर कोई अपने पार्टनर के साथ तो कोई अपने परिवार के साथ आए थे! पार्टनर के साथ कपल डांस कर रहे थे! मैं डिनर कर के मैं वहां से निकला.. सोचा यहां टहलते टहलते घर जाऊंगा, और तुम इतनी रात यहां कैसे? मैं यहां चंदनवाड़ी में आयी हूं..वहां तो समशान है! तुम्हें डर नहीं लगता.. उसमें डर ने वाली कोन सी बात है! आज न कल ‌हम सबको आख़री सफर करना है! जिवन का अंतिम सत्य यही है मौत! हम भी किस बारे में बात कर रहे हैं!  कितना अच्छा मौसम है! क़यो ना थोड़ी देर यहां बैठकर गपशप लड़ाते है! तुम्हें कहीं देरी तो नहीं हो रही हैं घर जाने की उसने कहा! मुझे कोई जल्दी नहीं है!  और  हम दोनों समुद्र तट पर बैठ गए! समुद्र को देख कर उसने कहां ये समुदर में कितनी गहराई है! फिर भी उपर से कितना शांत लग रहा है! बिल्कुल मेरी तरहां  मैं सोच में पड गया.. ऐसा क्या हुआ है! मैंने पुछा?.. कुछ नहीं.. छोड़ो कुछ अलग बात करते हैं! फिर उसने मुझे पुछा तुमने अभी तक शादी क्यु नहीं कि?.. तुम नहीं मिली ना.. मैंने हंस कर उसे जवाब दिया 
मजाक मत कर  तुषार.. तुम हंस कर बात को टाल रहे हो, नहीं सच कह रहा हूं.. तुम्हें पता है ना मैं तुम्हें कितना प्यार करता था! मैं काॅलेज में पढ़ रहा था! ओर तुम दसवीं कक्षा में पढ़ रही थी! तभी मैंने तुम्हें प्रपोज किया था! तुम्हे याद है वो
 राधा कृष्ण का मंदिर जहा तुम अक्सर जाया करती थी, वहीं पे तुम्हे मैंने प्रपोज किया था! पर उस वक्त कुछ भी न कहते वहां से निकल गयी थी! शायद तुम्हें बुरा लगा हो!  तुषार  सच कहूं तो मैं भी तुम्हें पसंद करती थी!  तुम्हें मन ही मन चाहने लगी थी!  तुमसे प्यार करने लगी थी, लेकिन मेरी भी कुछ मजबुरीया थी..चाहकर भी तुम्हें प्यार का इजहार नहीं कर सकी.. तुम्हें तो पता था ना हमारी घर की हालत.. बचपन में ही हमारे पिताजी गुजर गए थे! हम तिन बहनें एक छोटा भाई..कितने परीक्षम से हमें मां ने हमको पढ़ाया-लिखाया था! इस काबिल बनाया था कि हम अपने पैरों पर खड़े हो सकें, उस समय मैं तुम्हें प्यार का इजहार करती  और उनको पता चलता तो  उनको  कितना दुःख होता!  बड़े बहन की शादी भी  तो  करनी थी! उस वक्त में ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती जिसे उन्हें दूख पहूचे, खुद को संभलना उचित समझा, यह सब बातें तुम्हें बताना चाहती थी, लेकिन उसके बाद तुम दिखाई नहीं दिए,! मैं पूना चला गया था!  चाचा के यहां.. वहीं पूना में एजुकेशन कंप्लीट की , जब मैं मुंबई में आया तब पता चला तुम्हारी शादी हो चुकी है! में अंदर से पुरी तरह से तूट चुका था! तुम्हें भूलने की बहोत कोशिश की पर तुम्हें भुला नहीं सका..
तुषार तुम्हें धुडने की  मैंने भी बहोत कोशिश की, एक दिन तुम्हारा दोस्त विशाल से पुछा,  तभी मालूम पड़ा कि तुम पुना गये हो, मैं बेबस थी..उसी दरम्यान मेरे बड़े बहन की शादी तय हूई,हम सब खुश थे!  उसी शादी में एक परीवार ने मुझे देखा  ओर मेरी मां के सामने मेरे शादी का प्रस्ताव रखा..लड़का रेलवे में था!   अच्छी खासी नौकरी थी! मां ने लड़के को देख कर तुरंत शादी के लिए हामी भर दी! मां ने देखा लड़के कि अच्छी-खासी नोकरी है!  मेरी लड़की वहां खूश रहेगी.. मेरे सामने यह सबकुछ हो रहा था, मैं ख़ामोश थी! मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था! और मेरी शादी तय हुई! मां के चेहरे पर इतनी खुशी थी उस दिन, मेरे एक बेटी की शादी हो रही है! और दूसरे बेटी कि शादी तय हो रही थी! बहोत सालों बाद उसके चेहरे पर इतनी खुशी देखी थी मैंने, तो मैं 'ना' भी नहीं कर सकती, मां के सर से बेटी के शादी का बोझ हल्का होने वाला था! मैं ने शादी के लिए अपनी संमती दर्शाई ..शादी के कुछ दिनों में पता चला उन्हें शराब पीने की लत लगी है! काम से लौटते वक्त राजेश हमेशा शराब पीकर ही घर वापस आते थे! मैंने इस बारे में मां को कुछ नहीं बताया..उसे में और दुःख नहीं देना चाहति थी! किस कमोॆॏ का फल मुझे मिल रहा था! उनकी  शराब की लत और बढ़ गई थी! उसी दौरान मैंने बच्चे को जन्म दिया! बेटा होने से राजेश भी बहोत खूश था!, तभी एक दिन उन्हें खून की उल्टियां होने लगी, जैसे अचानक ज़िन्दगी ने करवट ली हो.. डॉ- क्टर ने कहा वो कुछ ही दिनों के मेहमान है! उन्हें अपने गलतीयो का एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी! और वो ्कुछ ही दिनों में चल बसे.. उसके कुछ दिनों बाद मां मेरे पास आई और बोली मुझसे भूल हुई बेटी मुझे तुम्हारी शादी करने से पहले देखना चाहिए था लड़का कैसा है, उसे कोई बुरी आदत तो नहीं.. बेटी मुझे माफ़ कर दो.. मां इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं, कोई भी मां अपने बच्चों का कभी बुरा नहीं चाहती..और तुम्हने  हमारे लिए जो किया है,  उतना कोई भी  अपने बच्चों के लिए नहीं करता.. अभी तो मैं मेरे बच्चे के साथ बहुत खुश हूं! अब यही मेरा जीवन है! उसे पढ़ाकर अच्छा इन्सान बनाउंगी.. हमें जो बचपन में नहीं मिला वो सब कुछ मेरे बच्चे  यश को देना चाहती हूं! अब  मेरा बच्चा यश हि अब मेरे जिन्हें की उम्मीद बन गई हैं!  कुछ दिनों में उनके जगह मुझे रेलवे में नैकरी मिली..
मुझे ये सुनकर बहोत दुःख हुआ, इतना सबकुछ तुम्हारे जिवन में हुआ फिर भी ईतनी शांत हो! ईस समुदर कि तरह वो हस कर बोली. इसी का नाम जिंदगी है! हम तो कठपुतलियां है हमारे जीवन की डोर कीसी और के हाथ में है!और  हमें नचा रहा है!
तुम्हें याद है तुषार हम दादर रेल्वे स्टेशन पर मिले थे, ऑफिस से में घर जा रही थी, और तुम १ नंबर प्लेटफार्म पर मिले थे! हम एक-दूसरे को देखते रह गए! ट्रैने आती जाती रहीं, औ र हम एक-दूसरे को बस देखते रह गए! एक दूसरे से क्या बात करे समझ में नहीं आ रहा था! बहोत सालों के बाद हम एक-दूसरे को देख रहे थे! हम दोनों एक दूसरे में इतने खो गए थे! खाली हाय हॅलो किया और वहां से निकल गये! तुम्हें नहीं पता लेकिन दुसरे दिन में वही प्लेटफार्म पर उसी समय मैं खड़ा रहा शायद तुमसे फिर से मुलाकात हो,  पुरे सप्ताह मे वहां तुम्हारा इंतज़ार करता रहा लेकिन उसके बाद तुम कभी दिखाई नहीं दी! मैंने उसे कहा! कैसे मिलती में तुम्हें काम से  हर शाम ४:३० बजे निकलती हूं  घर जाने के लिए उस दिन मुझे कुछ खरीदारी करनी थी इसलिए दादर स्टेशन उतरी थी! सामान खरीद कर घर वापस जाने के लिए दादर स्टेशन पे खड़ी थी तभी अचानक तुमसे मुलाकात हुई! 
         दुसरी बार मैंने  तुम्हें मां के साथ देखा था!  नवरात्र का उत्सव चल रहा था, तुम और तुम्हारी बहनें महालक्ष्मी मंदिर जा रही थी! हाथ में पूजा की थाली थी!  मुझे भी याद है मैंने भी तुम्हें देखा था! तुम उस वक्त बस स्टॉप पर खड़े थे! 
उसके बाद कुछ महीनों के बाद तुम्हें देखा, तुम्हारी तबियत नासाज लग रही थी! बहुत कमजोर लग रही थी! जैसे कि तुम्हें बड़ी बिमारियों ने तुम्हें घेर लिया हो! तुम अपने बेटे यश के साथ जा रही थी तभी तुम्हारी तबियत जानने के लिए तुम्हारे पास आया था लेकिन तभी तुम बिना कुछ कहे  टॅक्सी पकड़कर वहां से निकल पड़ी!  
उस दिन के बाद आज तुम दिखाई दे रही हो! नासाज तबियत का तुम्हारा चेहरा सामने आता था! और अभी देखा तो तंदुरुस्त नजर आ रही हो! इसलिए तुम्हें पहचान ने में थोड़ी देर लगा दि
तुम्हसे बात करके बहुत अच्छा लगा! दिल का बोझ हल्का हुआ, अब मैं किसी बोझ लेके नहीं मरना चाहती, अच्छा हुआ तुम से मुलाकात हुई! इस के बाद शायद ही तुमसे मुलाकात हो! उसने कहा!
बहोत देर हो चुकी है घर नहीं जाना तुम्हें, मैंने उसे कहा में तुम्हें घर छोड़ देता हूं,  उसेने कहा!  मेरी फ्रिक मत करो  तुम जाओ मैं आती हूं...तुम्हारा बेटा यश तुम्हारी राह देख रहा होगा, अब मुझे उसकी चिंता नहीं है! मेरी मां उसकी अच्छी तरह से खयाल रखती है! जैसे हमारा ख्याल रखा था! इसलिए आराम से घूम फिर रही हूं! तुम ऐसी बातें कर रही हो जो मेरे समझ से बाहर है!  बिदा होते वक़्त उसकी आंखें नम हो गई थी! एक-दूसरे को बाय करते वहां से निकल पड़े..घर लौटते वक्त उसी के बारे मै सोचता रहा! एक पहेली सी लग रही थी! कभी न सुलझने वाली.
दुसरे दिन सुबह मैं काम के लिए जाने लगा तो रास्ते में दोस्त मिला, विशाल जो कांदमबरी की मां रहती उसी बिल्डिंग में वो रहता था! उसने मुझे कहा, तुम्हें मालूम पड़ा क्या कांदमबरि की ब्लड कैंसर से  मौत हुई, कल सुबह हम अंतसंकार के लिए गए थे। कैसि बातें कर रहे हो! कल रात को तो मिली थीं, तुम्हें कोई भ्रम हुआ होगा,  मै समझ गया, स्तब्ध रहा!  ख़ामोश रहा गया..
उसे जो बात मुझसे करनी थी वो बात मरने के बाद कह डाली!

zindagi ka dastur

Har jagah logo ka rabta tha..
Khushiyon ka mahol tha
Achanak jindagi ne karvate li.
Jindagi theharsi gayi..
Har koi mazdhar mein fasa hai..
Ulaz raha hai zindagi ki is ulazano se
Zindagi ki naav bich samundar mein gote kha rahi hai..
Sahil ka pata puch  rahi hai..
Kab phir se zindagi patari pal chali aayegi
Jindagi hairan hai, do roti ke liye adami bhatak raha hai..idhar udhar..apno mein hai  phir bhi tanah hai.jaise nazar lagi hai khushi ko.
Lekin umid pe duniya kayam hai.
Ye duar bhi chala jayega..husala rakho..
Zindagi mein khushiyon ki bahar aayegi thoda dhiraj rakho. Kabhi dhoop hai to kabhi chhav hai..yahi zindgi hai..bus thoda intazaar karo..sayam se kaam lo.. phir logo ki aavajayi hogi .phir se logo ka rabta hoga.. khushiyon ka duar phir se aayega..Bus husala rako.

अनवट वाटा

पून्हा भेटशील वाटले नव्हते,
अनवट वाटेवरी, अलगद पापण्यांच्या कडा ओल्या झाल्या.
आणि आठवणी चा अल्बम नजरेत समोरून गेला.
एकमेकांना ओळखत असून ही अनोळखी होतो.
काय बोलावे ते सुचत नव्हते, शब्द अपुरे पडत होते.
पहात होतो एकमेकांना, निःशब्द..

Shayar ki baatein

Hum Aise hi gujar rahe the Raaste se.. Achanak wo Samne aayi.. Muskurai..mein bhi Muskuraya Bolchal hui..Hamesh ki tarah mein ne use choclate dedi usane haste haste wo swikar ki hamesha ki tarah Aur Boli..Tum Hamesha kuch na kuch gift dete hi rahate ho lekin mein ne aaj tak tume kuch nahi diya..mein ne usaki nazar se nazar milayi aur man hi man mein kaha..tumara hasna, tumari bebaaki se kahana, ooof majboor kar deti hai mastishk se aise shab nikal kar lafzo par Aakar kalam ban kar shabdon ki surili ladi ban ke kavita Ban jaati hai phir bhi kahati ho ki tum muje kuch nahi deti ho..mera gift to usake samne to kuch bhi nahi..ye baat man mein hi kahakar waha se nikal gaya (haste haste).

कविता

                राजकीय कार्यकर्ता

नेत्यांच्या सभेला पायघड्या घालून, सभेला उपस्थित राहणारा तो कार्यकर्ता, रात्रंदिवस पक्षा साठी झागडतो, कार्य सिद्धीस नेही तो कार्यकर्ता, नेत्यांच्या एका आदेशा वरून आंदोलने, दंगा घालून मार्ग तडीस नेण्यासाठी लागतो तो कार्यकर्ता, नेत्यांच्या सभेला गर्दी वाढवून सभेची शोभा वाढवणारा तो कार्यकर्ता!!
मात्र नेता, विरोधी पक्षांवर आगपाखड करुन सभेला मिळवतात हश्या आणि टाळ्या, तर कधी विरोधी पक्षांवर लगावतो टोला, आणि निवडणूक जवळ येता, घालतील गळ्यात गळा!!
नेत्यांच्या आप्ता च्या समारंभात असतो, विरोधी नेत्यांचा गोतावळा, तेथे ही थारा नसतो कार्यकर्तास.
कधी तरी अदबीने आमंत्रण दया, पान, सुपारी व अडकीत्ता.

निवडणूक जवळ येता, नेत्यांच्या जवळच्या ची वर्णी लागते..काका, मुलगा, पुतण्या.. तिथे ही उपेक्षित रहातो कार्यकर्ता...
कधीतरी विरोध दर्शवा नेत्याला कसा बघा भानावर येईल नेता!!

तुषार बागडे
भ्रमणध्वनी ९८२०७१८०७९

फरीश्ता

                                फरीश्ता  बंगलुरू में रहने वाले अग्निहोत्री दाम्पत्य अपनी पुश्तैनी मकान में रहते थे! दोनों ही बहुत ही अच्छे स...